जो अपराधु भगत कर करई

चौपाई ३, दोहा २१८ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

जो अपराधु भगत कर करई। राम रोष पावक सो जरई॥ लोकहुँ बेद बिदित इतिहासा। यह महिमा जानहिं दुरबासा॥ ३ ॥

अर्थ

पर जो कोई उनके भक्त का अपराध करता है, वह श्रीराम की क्रोधाग्नि में जल जाता है। लोक और वेद दोनों में इतिहास (कथा) प्रसिद्ध है। इस महिमा को दुर्वासा जी जानते हैं।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “इन्द्र-बृहस्पति संवाद” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा २१८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में इन्द्र की चिंता पर बृहस्पति द्वारा भरत-भक्ति की महिमा और राम-स्वभाव का उपदेश का वर्णन है।

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इन्द्र-बृहस्पति संवाद