जिन्ह तरुबरन्ह मध्य बटु सोहा

चौपाई २, दोहा २३७ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

जिन्ह तरुबरन्ह मध्य बटु सोहा। मंजु बिसाल देखि मनु मोहा॥ नील सघन पल्लव फल लाला। अबिरल छाहँ सुखद सब काला॥ २ ॥

अर्थ

जिन श्रेष्ठ वृक्षों के बीच में एक सुन्दर विशाल बड़ का वृक्ष सुशोभित है, उसको देखकर मन मोहित हो जाता है। उसके पत्ते नीले और सघन हैं और उसमें लाल फल लगे हैं। उसकी घनी छाया सब काल सुख देनेवाली है।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “भरत का चित्रकूट आगमन, मिलन और श्राद्ध” प्रकरण का चौपाई २, दोहा २३७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में भरत का मंदाकिनी स्नान, चित्रकूट आगमन, राम-सीता-लक्ष्मण से करुण मिलन और दशरथ का श्राद्ध का वर्णन है।

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भरत का चित्रकूट आगमन, मिलन और श्राद्ध