तब केवट ऊँचें चढ़ि धाई
तब केवट ऊँचें चढ़ि धाई
चौपाई १, दोहा २३७ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
तब केवट ऊँचें चढ़ि धाई।कहेउ भरत सन भुजा उठाई॥ नाथ देखिअहिं बिटप बिसाला। पाकरि जंबु रसाल तमाला॥ १ ॥
अर्थ
तब केवट ऊँचे चढ़कर दौड़ा और भुजा उठाकर भरतजी से कहने लगा—हे नाथ! ये जो पाकरि, जामुन, आम और तमाल के विशाल वृक्ष दिखायी देते हैं,
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “भरत का चित्रकूट आगमन, मिलन और श्राद्ध” प्रकरण का चौपाई १, दोहा २३७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में भरत का मंदाकिनी स्नान, चित्रकूट आगमन, राम-सीता-लक्ष्मण से करुण मिलन और दशरथ का श्राद्ध का वर्णन है।
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भरत का चित्रकूट आगमन, मिलन और श्राद्ध