जेहि लखि लखनहु तें अधिक मिले

दोहा २४३ · अयोध्याकाण्ड

दोहा पाठ

जेहि लखि लखनहु तें अधिक मिले मुदित मुनिराउ। सो सीतापति भजन को प्रगट प्रताप प्रभाउ॥ २४३ ॥

अर्थ

जिसे देखकर मुनिराज वसिष्ठजी लक्ष्मणजी से भी अधिक प्रसन्न होकर मिले। सो सीतापति-भजन का प्रगट प्रताप-प्रभाव है।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “भरत का चित्रकूट आगमन, मिलन और श्राद्ध” प्रकरण का दोहा २४३ है। इस प्रकरण में भरत का मंदाकिनी स्नान, चित्रकूट आगमन, राम-सीता-लक्ष्मण से करुण मिलन और दशरथ का श्राद्ध का वर्णन है।

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भरत का चित्रकूट आगमन, मिलन और श्राद्ध