जौं हठ करहु प्रेम बस बामा
जौं हठ करहु प्रेम बस बामा
चौपाई २, दोहा ६२ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
जौं हठ करहु प्रेम बस बामा। तौ तुम्ह दुखु पाउब परिनामा॥ काननु कठिन भयंकरु भारी। घोर घामु हिम बारि बयारी॥ २ ॥
अर्थ
हे वामा! यदि प्रेमवश हठ करोगी, तो तुम परिणाम में दुःख पाओगी। वन बड़ा कठिन (क्लेशदायक) और भयानक है। वहाँ की धूप, जाड़ा, वर्षा और हवा सभी बड़े भयानक हैं।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “श्रीसीता-राम-संवाद” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ६२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सीताजी का वनगमन का दृढ़ निश्चय और श्रीराम से प्रेमपूर्ण संवाद का वर्णन है।
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श्रीसीता-राम-संवाद