मैं पुनि करि प्रवान पितु बानी
मैं पुनि करि प्रवान पितु बानी
चौपाई १, दोहा ६२ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
मैं पुनि करि प्रवान पितु बानी। बेगि फिरब सुनु सुमुखि सयानी॥ दिवस जात नहिं लागिहि बारा। सुंदरि सिखवनु सुनहु हमारा॥ १ ॥
अर्थ
हे सुमुखि! हे सयानी! सुनो, मैं भी पिता के वचन को सत्य करके शीघ्र ही लौटूँगा। दिन बीतने में देर नहीं लगेगी। हे सुन्दरी! हमारी यह सीख सुनो!
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “श्रीसीता-राम-संवाद” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ६२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सीताजी का वनगमन का दृढ़ निश्चय और श्रीराम से प्रेमपूर्ण संवाद का वर्णन है।
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श्रीसीता-राम-संवाद