जौं ए कंद मूल फल खाहीं
जौं ए कंद मूल फल खाहीं
चौपाई १, दोहा १२० के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
जौं ए कंद मूल फल खाहीं। बादि सुधादि असन जग माहीं॥ एक कहहिं ए सहज सुहाए। आपु प्रगट भए बिधि न बनाए॥ १ ॥
अर्थ
जो ये कन्द, मूल, फल खाते हैं तो जगत् में अमृत आदि भोजन व्यर्थ ही हैं। कोई एक कहते हैं—ये स्वभाव से ही सुन्दर हैं [इनका सौन्दर्य-माधुर्य नित्य और स्वाभाविक है]। ये अपने-आप प्रकट हुए हैं, ब्रह्मा के बनाये नहीं हैं।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “यमुना को प्रणाम, वनवासियों का प्रेम” प्रकरण का चौपाई १, दोहा १२० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में यमुना-प्रणाम और मार्ग में वनवासियों व ग्रामवासियों के प्रेममय दर्शन का वर्णन है।
पूरा प्रकरण पढ़ें
पूरा प्रकरण पढ़ें
यमुना को प्रणाम, वनवासियों का प्रेम