बनु देखाइ सुरसरि अन्हवाई
बनु देखाइ सुरसरि अन्हवाई
चौपाई ४, दोहा ९४ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
बनु देखाइ सुरसरि अन्हवाई। आनेहु फेरि बेगि दोउ भाई॥ लखनु रामु सिय आनेहु फेरी। संसय सकल सँकोच निबेरी॥ ४ ॥
अर्थ
वन दिखाकर, सुरसरि में नहलाकर दोनों भाइयों को तुरंत लौटा लाना। सब संशय और संकोच को दूर करके लक्ष्मण, राम, सीता को फिरा लाना।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “लक्ष्मण-निषाद संवाद, सुमंत्र की वापसी” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ९४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में लक्ष्मण-निषाद संवाद, सीता-राम से विदा लेकर सुमंत्र के भारी मन से अयोध्या लौटने का वर्णन है।
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लक्ष्मण-निषाद संवाद, सुमंत्र की वापसी