हम सब सानुज भरतहि देखें

चौपाई २, दोहा २२३ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

हम सब सानुज भरतहि देखें। भइन्ह धन्य जुबती जन लेखें॥ सुनि गुन देखि दसा पछिताहीं। कैकइ जननि जोगु सुतु नाहीं॥ २ ॥

अर्थ

छोटे भाई के साथ भरतजी को देखकर हम सब भी आज धन्य जुबती जन की गिनती में आ गयीं। इस प्रकार भरतजी के गुण सुनकर और उनकी दशा देखकर स्त्रियाँ पछताती हैं और कहती हैं--यह पुत्र कैकेयी-जैसी माताके योग्य नहीं है।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “भरतजी चित्रकूट के मार्ग में” प्रकरण का चौपाई २, दोहा २२३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में भरतजी का चित्रकूट की ओर विरह और दीनभाव से प्रस्थान का वर्णन है।

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भरतजी चित्रकूट के मार्ग में