गुरहि देखि सानुज अनुरागे

चौपाई २, दोहा २४३ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

गुरहि देखि सानुज अनुरागे। दंड प्रनाम करन प्रभु लागे॥ मुनिबर धाइ लिए उर लाई। प्रेम उमगि भेंटे दोउ भाई॥ २ ॥

अर्थ

गुरुजी के दर्शन करके लक्ष्मणजी सहित प्रभु श्रीरामचन्द्रजी प्रेम में भर गये और दण्ड प्रणाम करने लगे। मुनिवर दौड़कर उन्हें उर में लगा लिया। प्रेम उमंगकर दोनों भाई भेंटे।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “भरत का चित्रकूट आगमन, मिलन और श्राद्ध” प्रकरण का चौपाई २, दोहा २४३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में भरत का मंदाकिनी स्नान, चित्रकूट आगमन, राम-सीता-लक्ष्मण से करुण मिलन और दशरथ का श्राद्ध का वर्णन है।

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भरत का चित्रकूट आगमन, मिलन और श्राद्ध