सीलसिंधु सुनि गुर आगवनू

चौपाई १, दोहा २४३ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

सीलसिंधु सुनि गुर आगवनू। सिय समीप राखे रिपुदवनू॥ चले सबेग रामु तेहि काला। धीर धरम धुर दीनदयाला॥ १ ॥

अर्थ

गुरु का आगमन सुनकर शील के समुद्र श्रीरामचन्द्रजी ने सीताजी के पास रिपुदवनू को रख दिया और वे परम धीर, धर्मधुरन्धर, दीनदयालु श्रीरामचन्द्रजी उसी समय वेग के साथ चल पड़े।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “भरत का चित्रकूट आगमन, मिलन और श्राद्ध” प्रकरण का चौपाई १, दोहा २४३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में भरत का मंदाकिनी स्नान, चित्रकूट आगमन, राम-सीता-लक्ष्मण से करुण मिलन और दशरथ का श्राद्ध का वर्णन है।

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भरत का चित्रकूट आगमन, मिलन और श्राद्ध