गुर पद कमल प्रनामु करि बैठे

दोहा २५३ · अयोध्याकाण्ड

दोहा पाठ

गुर पद कमल प्रनामु करि बैठे आयसु पाइ। बिप्र महाजन सचिव सब जुरे सभासद आइ॥ २५३ ॥

अर्थ

भरतजी गुरु के चरणकमलों में प्रणाम करके आज्ञा पाकर बैठ गये। उसी समय ब्राह्मण, महाजन, मन्त्री आदि सभी सभासद आकर जुट गये।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “वनवासियों द्वारा सत्कार, कैकेयी का पश्चाताप” प्रकरण का दोहा २५३ है। इस प्रकरण में वनवासियों द्वारा भरतजी की मंडली के सत्कार और कैकेयी के गहन पश्चाताप का वर्णन है।

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वनवासियों द्वारा सत्कार, कैकेयी का पश्चाताप