बोले मुनिबरु समय समाना
बोले मुनिबरु समय समाना
चौपाई १, दोहा २५४ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
बोले मुनिबरु समय समाना। सुनहु सभासद भरत सुजाना॥ धरम धुरीन भानुकुल भानू। राजा रामु स्वबस भगवानू॥ १ ॥
अर्थ
श्रेष्ठ मुनि वसिष्ठजी समयोचित वचन बोले--हे सभासदो! हे सुजान भरत! सुनो। सूर्यकुल के सूर्य महाराज श्रीरामचन्द्र धर्मधुरन्धर और स्वतन्त्र भगवान् हैं।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “श्रीवसिष्ठजी का भाषण” प्रकरण का चौपाई १, दोहा २५४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में चित्रकूट की सभा में वसिष्ठजी द्वारा धर्म, मर्यादा और भरत-भक्ति पर दिए गए मार्गदर्शक वचनों का वर्णन है।
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श्रीवसिष्ठजी का भाषण