गुहँ बोलाइ पाहरू प्रतीती
गुहँ बोलाइ पाहरू प्रतीती
चौपाई २, दोहा ९० के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
गुहँ बोलाइ पाहरू प्रतीती। ठावँ ठावँ राखे अति प्रीती॥ आपु लखन पहिं बैठेउ जाई। कटि भाथी सर चाप चढ़ाई॥ २ ॥
अर्थ
गुह ने विश्वासपात्र पहरेदारों को बुलाकर अत्यन्त प्रेम से जगह-जगह नियुक्त कर दिया। और आप कमर में तरकस बाँधकर तथा धनुष पर बाण चढ़ाकर लक्ष्मणजी के पास जा बैठा।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “लक्ष्मण-निषाद संवाद, सुमंत्र की वापसी” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ९० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में लक्ष्मण-निषाद संवाद, सीता-राम से विदा लेकर सुमंत्र के भारी मन से अयोध्या लौटने का वर्णन है।
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लक्ष्मण-निषाद संवाद, सुमंत्र की वापसी