गहि पद लगे सुमित्रा अंका

चौपाई २, दोहा २४५ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

गहि पद लगे सुमित्रा अंका। जनु भेंटी संपति अति रंका॥ पुनि जननी चरननि दोउ भ्राता। परे पेम ब्याकुल सब गाता॥ २ ॥

अर्थ

तब दोनों भाई पैर पकड़कर सुमित्राजी की अंका में जा चिपटे। मानो किसी अत्यन्त रंक को सम्पत्ति से भेंट हो गयी हो। फिर दोनों भाई माता के चरणों में गिर पड़े। प्रेम के मारे उनके सारे अंग व्याकुल हो गये।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “भरत का चित्रकूट आगमन, मिलन और श्राद्ध” प्रकरण का चौपाई २, दोहा २४५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में भरत का मंदाकिनी स्नान, चित्रकूट आगमन, राम-सीता-लक्ष्मण से करुण मिलन और दशरथ का श्राद्ध का वर्णन है।

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भरत का चित्रकूट आगमन, मिलन और श्राद्ध