गए अवध चर भरत गति बूझि

दोहा २७१ · अयोध्याकाण्ड

दोहा पाठ

गए अवध चर भरत गति बूझि देखि करतूति। चले चित्रकूटहि भरतु चार चले तेरहूति॥ २७१ ॥

अर्थ

गुप्तचर अवध को गये और भरतजी का ढंग जानकर तथा उनकी करनी देखकर, वे चित्रकूट को चले। भरतजी के साथ चारों तिरहुत चले गये।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “श्रीराम-भरतादि का संवाद” प्रकरण का दोहा २७१ है। इस प्रकरण में सभा में श्रीराम और भरत के बीच धर्म, राज्य और पितृ आज्ञा विषयक गंभीर संवाद का वर्णन है।

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श्रीराम-भरतादि का संवाद