दूतन्ह आइ भरत कइ करनी

चौपाई १, दोहा २७२ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

दूतन्ह आइ भरत कइ करनी। जनक समाज जथामति बरनी॥ सुनि गुर परिजन सचिव महीपति। भे सब सोच सनेहँ बिकल अति॥ १ ॥

अर्थ

दूतोंने आकर राजा जनकजी की सभा में भरतजी की करनी का अपनी बुद्धि के अनुसार वर्णन किया। उसे सुनकर गुरु, परिजन, मन्त्री और राजा सभी सोच और स्नेह से अत्यन्त व्याकुल हो गये।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “जनकजी का चित्रकूट आगमन, सबका मिलन” प्रकरण का चौपाई १, दोहा २७२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में राजा जनक का चित्रकूट आगमन और कोल-किरात सहित सभी का प्रेमपूर्ण मिलन का वर्णन है।

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जनकजी का चित्रकूट आगमन, सबका मिलन