एकटक सब सोहहिं चहुँ ओरा
एकटक सब सोहहिं चहुँ ओरा
चौपाई ३, दोहा ११५ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
एकटक सब सोहहिं चहुँ ओरा। रामचंद्र मुख चंद चकोरा॥ तरुन तमाल बरन तनु सोहा। देखत कोटि मदन मनु मोहा॥ ३ ॥
अर्थ
सब लोग टकटकी लगाये श्रीरामचन्द्रजी के मुखचन्द्र को चकोर की तरह (तन्मय होकर) देखते हुए चारों ओर सुशोभित हो रहे हैं। श्रीरामजी का नवीन तमाल वृक्ष के रंग का (श्याम) शरीर अत्यन्त शोभा दे रहा है, जिसे देखते ही करोड़ों कामदेवों के मन मोहित हो जाते हैं।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “यमुना को प्रणाम, वनवासियों का प्रेम” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ११५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में यमुना-प्रणाम और मार्ग में वनवासियों व ग्रामवासियों के प्रेममय दर्शन का वर्णन है।
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यमुना को प्रणाम, वनवासियों का प्रेम