एहि बिधि राति लोगु सबु जागा

चौपाई ४, दोहा २०२ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

एहि बिधि राति लोगु सबु जागा। भा भिनुसार गुदारा लागा॥ गुरहि सुनावँ चढ़ाइ सुहाईं। नईं नाव सब मातु चढ़ाईं॥ ४ ॥

अर्थ

इस प्रकार रात भर सब लोग जागते रहे। सबेरा होते ही खेवा लगा। सुन्दर नाव पर गुरुजी को चढ़ाकर फिर नयी नाव पर सब माताओं को चढ़ाया।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “भरत-निषाद मिलन” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा २०२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में भरत और निषादराज के भावपूर्ण मिलन-संवाद तथा नगरवासियों की भक्ति का वर्णन है।

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भरत-निषाद मिलन