दीन बचन कह बहुबिधि रानी
दीन बचन कह बहुबिधि रानी
चौपाई २, दोहा २१ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
दीन बचन कह बहुबिधि रानी। सुनि कुबरीं तियमाया ठानी॥ अस कस कहहु मानि मन ऊना। सुखु सोहागु तुम्ह कहुँ दिन दूना॥ २ ॥
अर्थ
रानी ने बहुत प्रकार के दीन वचन कहे। उन्हें सुनकर कुबरी ने स्त्री-माया ठानी। [वह बोली--] तुम मन में ग्लानि मानकर ऐसा क्यों कह रही हो, तुम्हारा सुख-सुहाग दिन-दिन दूना होगा।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “सरस्वती का मंथरा की बुद्धि फेरना” प्रकरण का चौपाई २, दोहा २१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सरस्वती द्वारा मंथरा की बुद्धि फेरना और कैकेयी को वरदान माँगने के लिए उकसाने का वर्णन है।
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सरस्वती का मंथरा की बुद्धि फेरना