दीख निषादनाथ भल टोलू

चौपाई २, दोहा १९२ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

दीख निषादनाथ भल टोलू। कहेउ बजाउ जुझाऊ ढोलू॥ एतना कहत छींक भइ बाँए। कहेउ सगुनिअन्ह खेत सुहाए॥ २ ॥

अर्थ

निषादराज ने वीरों का बढ़िया दल देखकर कहा--जुझाऊ (लड़ाई का) ढोल बजाओ। इतना कहते ही बायीं ओर छींक हुई। शकुन विचारने वालों ने कहा कि खेत सुन्दर हैं (जीत होगी)।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “निषाद की शंका और सावधानी” प्रकरण का चौपाई २, दोहा १९२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में भरत की सेना देख निषादराज गुह की शंका और सावधानी का वर्णन है।

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निषाद की शंका और सावधानी