ध्रुव बिस्वासु अवधि राका सी

चौपाई ३, दोहा ३२५ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

ध्रुव बिस्वासु अवधि राका सी। स्वामि सुरति सुरबीथि बिकासी॥ राम पेम बिधु अचल अदोषा। सहित समाज सोह नित चोखा॥ ३ ॥

अर्थ

विश्वास ही [उस आकाश में] ध्रुवतारा है, चौदह वर्षों की अवधि पूर्णिमा के समान है, और स्वामी श्रीरामजी की स्मृति आकाश-पथ में प्रकाशित है। राम-प्रेम ही अचल और कलंक-दोषरहित चन्द्रमा है। वह अपने समाज [नक्षत्रों] सहित नित्य सुन्दर सुशोभित है।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “भरत की वापसी, पादुका स्थापना, नंदिग्राम निवास” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ३२५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में भरतजी की अयोध्या वापसी, पादुका स्थापना, नंदिग्राम निवास और भरत-चरित्र श्रवण की महिमा का वर्णन है।

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भरत की वापसी, पादुका स्थापना, नंदिग्राम निवास