देव देव अभिषेक हित गुर अनुसासनु

दोहा ३०७ · अयोध्याकाण्ड

दोहा पाठ

देव देव अभिषेक हित गुर अनुसासनु पाइ। आनेउँ सब तीरथ सलिलु तेहि कहँ काह रजाइ॥ ३०७ ॥

अर्थ

हे देव! स्वामी (आप) के अभिषेक के लिये गुरुजी की आज्ञा पाकर मैं सब तीर्थों का जल लेता आया हूँ; उसके लिये क्या आज्ञा होती है ?

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “श्रीराम-भरत संवाद” प्रकरण का दोहा ३०७ है। इस प्रकरण में श्रीराम द्वारा भरत को पितृ आज्ञा, राजधर्म और समर्पण का उपदेश का वर्णन है।

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श्रीराम-भरत संवाद