सोक सनेहँ कि बाल सुभाएँ
सोक सनेहँ कि बाल सुभाएँ
चौपाई १, दोहा ३०० के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
सोक सनेहँ कि बाल सुभाएँ। आयउँ लाइ रजायसु बाएँ॥ तबहुँ कृपाल हेरि निज ओरा। सबहि भाँति भल मानेउ मोरा॥ १ ॥
अर्थ
मैं शोक से या स्नेह से या बालक स्वभाव से आज्ञा को बायें लाकर (न मानकर) चला आया, तो भी कृपालु स्वामी (आप) ने अपनी ओर देखकर सभी प्रकार से मेरा भला ही माना (मेरे इस अनुचित कार्य को अच्छा ही समझा)।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “श्रीराम-भरत संवाद” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ३०० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम द्वारा भरत को पितृ आज्ञा, राजधर्म और समर्पण का उपदेश का वर्णन है।
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श्रीराम-भरत संवाद