देखे थल तीरथ सकल भरत पाँच
देखे थल तीरथ सकल भरत पाँच
दोहा ३१२ · अयोध्याकाण्ड
दोहा पाठ
देखे थल तीरथ सकल भरत पाँच दिन माझ। कहत सुनत हरि हर सुजसु गयउ दिवसु भइ साँझ॥ ३१२ ॥
अर्थ
भरतजी ने पाँच दिन में सब तीर्थस्थानों के दर्शन कर लिये। भगवान् विष्णु और महादेवजी का सुन्दर यश कहते-सुनते वह (पाँचवाँ) दिन भी बीत गया, सन्ध्या हो गयी।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “भरत का तीर्थ जल स्थापन” प्रकरण का दोहा ३१२ है। इस प्रकरण में भरतजी द्वारा तीर्थ जल स्थापन और चित्रकूट के पवित्र स्थलों का दर्शन का वर्णन है।
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भरत का तीर्थ जल स्थापन