दासीं दास बोलाइ बहोरी
दासीं दास बोलाइ बहोरी
चौपाई ३, दोहा ८० के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
दासीं दास बोलाइ बहोरी। गुरहि सौंपि बोले कर जोरी॥ सब कै सार सँभार गोसाईं। करबि जनक जननी की नाईं॥ ३ ॥
अर्थ
फिर दास-दासियों को बुलाकर उन्हें गुरुजी को सौंपकर, हाथ जोड़कर बोले- हे गुसाईं! इन सबकी माता-पिता के समान सार-सँभार करते रहियेगा।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “वनगमन, नगरवासियों को छोड़कर आगे बढ़ना” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ८० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम, सीता और लक्ष्मण के वनगमन और नगरवासियों को सोता छोड़कर आगे बढ़ने का वर्णन है।
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वनगमन, नगरवासियों को छोड़कर आगे बढ़ना