बारहिं बार जोरि जुग पानी

चौपाई ४, दोहा ८० के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

बारहिं बार जोरि जुग पानी। कहत रामु सब सन मृदु बानी॥ सोइ सब भाँति मोर हितकारी। जेहि तें रहै भुआल सुखारी॥ ४ ॥

अर्थ

श्रीरामचन्द्रजी बार-बार दोनों हाथ जोड़कर सबसे कोमल वाणी में कहते हैं कि मेरा सब प्रकार से हितकारी मित्र वही होगा जिससे महाराज सुखी रहें।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “वनगमन, नगरवासियों को छोड़कर आगे बढ़ना” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ८० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम, सीता और लक्ष्मण के वनगमन और नगरवासियों को सोता छोड़कर आगे बढ़ने का वर्णन है।

पूरा प्रकरण पढ़ें

पूरा प्रकरण पढ़ें
वनगमन, नगरवासियों को छोड़कर आगे बढ़ना