दलि दुख सजइ सकल कल्याना
दलि दुख सजइ सकल कल्याना
चौपाई ४, दोहा २५५ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
दलि दुख सजइ सकल कल्याना। अस असीस राउरि जगु जाना॥ सो गोसाइँ बिधि गति जेहिं छेंकी। सकइ को टारि टेक जो टेकी॥ ४ ॥
अर्थ
आपकी आशिष ही एक ऐसी है जो दुःखों का दमन करके, समस्त कल्याणों को सजा देती है; यह जगत् जानता है। हे स्वामी! आप वही हैं जिन्होंने विधाता की गति को भी रोक दिया। आपने जो टेक टेक दी उसे कौन टाल सकता है ?
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “श्रीवसिष्ठजी का भाषण” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा २५५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में चित्रकूट की सभा में वसिष्ठजी द्वारा धर्म, मर्यादा और भरत-भक्ति पर दिए गए मार्गदर्शक वचनों का वर्णन है।
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श्रीवसिष्ठजी का भाषण