प्रथम जाइ जिन्ह बचन सुनाए

चौपाई १, दोहा ८ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

प्रथम जाइ जिन्ह बचन सुनाए। भूषन बसन भूरि तिन्ह पाए॥ प्रेम पुलकि तन मन अनुरागीं। मंगल कलस सजन सब लागीं॥ १ ॥

अर्थ

सबसे पहले [रनिवास में] जाकर जिन्होंने ये वचन सुनाये, उन्होंने बहुत-से आभूषण और वस्त्र पाये। रानियों का शरीर प्रेम से पुलकित हो उठा और मन प्रेम में अनुरागी हो गया। वे सब मङ्गलकलश सजाने लगीं।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “राज्याभिषेक की तैयारी, देवताओं की प्रार्थना” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में रामराज्याभिषेक की तैयारी और देवताओं द्वारा सरस्वतीजी से वनगमन हेतु प्रार्थना का वर्णन है।

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राज्याभिषेक की तैयारी, देवताओं की प्रार्थना