चरनपीठ करुनानिधान के

चौपाई ३, दोहा ३१६ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

चरनपीठ करुनानिधान के। जनु जुग जामिक प्रजा प्रान के॥ संपुट भरत सनेह रतन के। आखर जुग जनु जीव जतन के॥ ३ ॥

अर्थ

करुणानिधान श्रीरामचन्द्रजी के दोनों खड़ाऊँ प्रजा के प्राणों की रक्षा के लिये मानो दो पहरेदार हैं। भरतजी के प्रेमरूपी रत्न के लिये मानो डिब्बा है और जीव के साधन के लिये मानो राम-नाम के दो अक्षर हैं।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “राम द्वारा पादुका प्रदान, भरत की विदाई” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ३१६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम द्वारा भरतजी को पादुका प्रदान और भरतजी की भावपूर्ण विदाई का वर्णन है।

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राम द्वारा पादुका प्रदान, भरत की विदाई