चले निषाद जोहारि जोहारी
चले निषाद जोहारि जोहारी
चौपाई २, दोहा १९१ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
चले निषाद जोहारि जोहारी। सूर सकल रन रूचइ रारी॥ सुमिरि राम पद पंकज पनहीं। भाथीं बाँधि चढ़ाइन्हि धनहीं॥ २ ॥
अर्थ
निषादराज को जोहार कर-करके सब निषाद चले। सभी बड़े शूरवीर हैं और संग्राम में लड़ना उन्हें बहुत अच्छा लगता है। श्रीरामचन्द्रजी के चरणकमलों की जूतियों का स्मरण करके उन्होंने भाथियाँ बाँधकर धनुषों पर प्रत्यंचा चढ़ायीं।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “निषाद की शंका और सावधानी” प्रकरण का चौपाई २, दोहा १९१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में भरत की सेना देख निषादराज गुह की शंका और सावधानी का वर्णन है।
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निषाद की शंका और सावधानी