बेगहु भाइहु सजहु सँजोऊ

चौपाई १, दोहा १९१ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

बेगहु भाइहु सजहु सँजोऊ। सुनि रजाइ कदराइ न कोऊ॥ भलेहिं नाथ सब कहहिं सहरषा। एकहिं एक बढ़ावइ करषा॥ १ ॥

अर्थ

[उसने कहा--] हे भाइयो! जल्दी करो और सब सामान सजाओ। मेरी आज्ञा सुनकर कोई मन में कायरता न लावे। सब हर्ष के साथ बोल उठे-हे नाथ! बहुत अच्छा; और आपस में एक दूसरे का जोश बढ़ाने लगे।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “निषाद की शंका और सावधानी” प्रकरण का चौपाई १, दोहा १९१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में भरत की सेना देख निषादराज गुह की शंका और सावधानी का वर्णन है।

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निषाद की शंका और सावधानी