आरत जननी जानि सब भरत सनेह
आरत जननी जानि सब भरत सनेह
दोहा १८६ · अयोध्याकाण्ड
दोहा पाठ
आरत जननी जानि सब भरत सनेह सुजान। कहेउ बनावन पालकीं सजन सुखासन जान॥ १८६ ॥
अर्थ
स्नेह के सुजान (प्रेम के तत्त्व को जानने वाले) भरतजी ने सब माताओं को आर्त (दुखी) जानकर उनके लिये पालकियाँ तैयार करने तथा सुखासन-यान (सुखपाल) सजाने के लिये कहा।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “वसिष्ठ-भरत संवाद, चित्रकूट यात्रा की तैयारी” प्रकरण का दोहा १८६ है। इस प्रकरण में गुरु वसिष्ठ द्वारा भरत को धर्म-उपदेश और चित्रकूट यात्रा की तैयारी का वर्णन है।
पूरा प्रकरण पढ़ें
पूरा प्रकरण पढ़ें
वसिष्ठ-भरत संवाद, चित्रकूट यात्रा की तैयारी