बिसमय हरष रहित रघुराऊ

चौपाई २, दोहा १२ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

बिसमय हरष रहित रघुराऊ। तुम्ह जानहु सब राम प्रभाऊ॥ जीव करम बस सुख दुख भागी। जाइअ अवध देवहित लागी॥ २ ॥

अर्थ

श्रीरघुनाथजी विषाद और हर्ष से रहित हैं। आप तो श्रीरामजी के सब प्रभाव को जानती ही हैं। जीव अपने कर्मवश ही सुख-दुःख का भागी होता है। अतएव देवताओं के हित के लिये आप अयोध्या जाइये।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “राज्याभिषेक की तैयारी, देवताओं की प्रार्थना” प्रकरण का चौपाई २, दोहा १२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में रामराज्याभिषेक की तैयारी और देवताओं द्वारा सरस्वतीजी से वनगमन हेतु प्रार्थना का वर्णन है।

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राज्याभिषेक की तैयारी, देवताओं की प्रार्थना