भूपति राम सपथ जब करई
भूपति राम सपथ जब करई
चौपाई ४, दोहा २२ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
भूपति राम सपथ जब करई। तब मागेहु जेहिं बचनु न टरई॥ होइ अकाजु आजु निसि बीतें। बचनु मोर प्रिय मानेहु जी तें॥ ४ ॥
अर्थ
जब राजा राम की सौगंध खा लें, तब वर माँगना, जिससे वचन न टलने पावे। आज की रात बीत गयी, तो काम बिगड़ जायगा। मेरी बात को हृदय से प्रिय [या प्राणों से भी प्यारी] समझना।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “सरस्वती का मंथरा की बुद्धि फेरना” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा २२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सरस्वती द्वारा मंथरा की बुद्धि फेरना और कैकेयी को वरदान माँगने के लिए उकसाने का वर्णन है।
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सरस्वती का मंथरा की बुद्धि फेरना