बड़ कुघातु करि पातकिनि कहेसि कोपगृहँ

दोहा २२ · अयोध्याकाण्ड

दोहा पाठ

बड़ कुघातु करि पातकिनि कहेसि कोपगृहँ जाहु। काजु सँवारेहु सजग सबु सहसा जनि पतिआहु॥ २२ ॥

अर्थ

पापिनी मंथरा ने बड़ी बुरी घात लगाकर कहा--कोपभवन में जाओ। सब काम बड़ी सावधानी से बनाना, राजा पर सहसा विश्वास न कर लेना (उनकी बातों में न आ जाना)।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “सरस्वती का मंथरा की बुद्धि फेरना” प्रकरण का दोहा २२ है। इस प्रकरण में सरस्वती द्वारा मंथरा की बुद्धि फेरना और कैकेयी को वरदान माँगने के लिए उकसाने का वर्णन है।

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सरस्वती का मंथरा की बुद्धि फेरना