भूप मनोरथ सुभग बनु सुख सुबिहंग
भूप मनोरथ सुभग बनु सुख सुबिहंग
दोहा २८ · अयोध्याकाण्ड
दोहा पाठ
भूप मनोरथ सुभग बनु सुख सुबिहंग समाजु। भिल्लिनि जिमि छाड़न चहति बचनु भयंकरु बाजु॥ २८ ॥
अर्थ
राजा का मनोरथ सुन्दर वन है, सुख सुन्दर पक्षियों का समुदाय है। उस पर भीलनी की तरह कैकेयी अपना वचनरूपी भयंकर बाज छोड़ना चाहती है।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “दशरथ-कैकेयी संवाद, सुमंत्र का राम को बुलाना” प्रकरण का दोहा २८ है। इस प्रकरण में दशरथ-कैकेयी संवाद, दो वरों की माँग और सुमंत्र द्वारा श्रीराम को महल में बुलाने का वर्णन है।
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दशरथ-कैकेयी संवाद, सुमंत्र का राम को बुलाना