तेहि पर राम सपथ करि आई

चौपाई ४, दोहा २८ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

तेहि पर राम सपथ करि आई। सुकृत सनेह अवधि रघुराई॥ बात दृढ़ाइ कुमति हँसि बोली। कुमत कुबिहग कुलह जनु खोली॥ ४ ॥

अर्थ

उस पर मेरे द्वारा श्रीरामजी की शपथ कर आई (मुँह से निकल पड़ी)। श्रीरघुनाथजी मेरे सुकृत (पुण्य) और स्नेह की सीमा हैं। इस प्रकार बात पक्की कराके दुर्बुद्धि कैकेयी हँसकर बोली, मानो उसने कुमत (बुरे विचार) रूपी दुष्ट पक्षी (बाज) की कुलही (आँखों पर की टोपी) खोल दी।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “दशरथ-कैकेयी संवाद, सुमंत्र का राम को बुलाना” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा २८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में दशरथ-कैकेयी संवाद, दो वरों की माँग और सुमंत्र द्वारा श्रीराम को महल में बुलाने का वर्णन है।

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दशरथ-कैकेयी संवाद, सुमंत्र का राम को बुलाना