जासु सनेह सकोच बस राम प्रगट
जासु सनेह सकोच बस राम प्रगट
दोहा २०९ · अयोध्याकाण्ड
दोहा पाठ
जासु सनेह सकोच बस राम प्रगट भए आइ। जे हर हिय नयननि कबहुँ निरखे नहीं अघाइ॥ २०९ ॥
अर्थ
जिनके प्रेम और संकोच (शील) के वश में होकर स्वयं [सच्चिदानन्दघन] भगवान् श्रीराम आकर प्रकट हुए, जिन्हें श्रीमहादेवजी अपने हृदय के नेत्रों से कभी अघाकर नहीं देख पाये (अर्थात् जिनका स्वरूप हृदय में देखते-देखते शिवजी कभी तृप्त नहीं हुए)।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “भरतजी का प्रयाग, भरद्वाज से संवाद” प्रकरण का दोहा २०९ है। इस प्रकरण में भरतजी का प्रयाग तीर्थ दर्शन और महर्षि भरद्वाज से भक्तिपूर्ण संवाद का वर्णन है।
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भरतजी का प्रयाग, भरद्वाज से संवाद