भरत अत्रि अनुसासन पाई

चौपाई १, दोहा ३१० के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

भरत अत्रि अनुसासन पाई। जल भाजन सब दिए चलाई॥ सानुज आपु अत्रि मुनि साधू। सहित गए जहँ कूप अगाधू॥ १ ॥

अर्थ

भरतजी ने अत्रिमुनि की आज्ञा पाकर जल के सब पात्र रवाना कर दिये और अपने छोटे भाई के साथ, अत्रि मुनि तथा अन्य साधु-सन्तों सहित आप वहाँ गये जहाँ वह अथाह कुआँ था।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “भरत का तीर्थ जल स्थापन” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ३१० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में भरतजी द्वारा तीर्थ जल स्थापन और चित्रकूट के पवित्र स्थलों का दर्शन का वर्णन है।

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भरत का तीर्थ जल स्थापन