भाइहु लावहु धोख जनि आजु काज

दोहा १९१ · अयोध्याकाण्ड

दोहा पाठ

भाइहु लावहु धोख जनि आजु काज बड़ मोहि। सुनि सरोष बोले सुभट बीर अधीर न होहि॥ १९१ ॥

अर्थ

[उसने कहा--] हे भाइयो! धोखा न लाना (अर्थात्‌ मरने से न घबराना), आज मेरा बड़ा भारी काम है। यह सुनकर सब योद्धा बड़े जोश के साथ बोल उठे-हे वीर! अधीर मत हो।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “निषाद की शंका और सावधानी” प्रकरण का दोहा १९१ है। इस प्रकरण में भरत की सेना देख निषादराज गुह की शंका और सावधानी का वर्णन है।

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निषाद की शंका और सावधानी