बसहिं कुदेस कुगाँव कुबामा
बसहिं कुदेस कुगाँव कुबामा
चौपाई ४, दोहा २२३ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
बसहिं कुदेस कुगाँव कुबामा। कहँ यह दरसु पुन्य परिनामा॥ अस अनंदु अचिरिजु प्रति ग्रामा। जनु मरुभूमि कलपतरु जामा॥ ४ ॥
अर्थ
जो बुरे देश (जंगली प्रान्त) और बुरे गाँव में बसती हैं और [स्त्रियों में भी] नीच स्त्रियाँ हैं! और कहाँ यह महान पुण्यों का परिणामस्वरूप इनका दर्शन! ऐसा ही आनन्द और आश्चर्य गाँव-गाँव में हो रहा है। मानो मरुभूमि में कल्पवृक्ष उग गया हो।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “भरतजी चित्रकूट के मार्ग में” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा २२३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में भरतजी का चित्रकूट की ओर विरह और दीनभाव से प्रस्थान का वर्णन है।
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भरतजी चित्रकूट के मार्ग में