भरत दरसु देखत खुलेउ मग लोगन्ह
भरत दरसु देखत खुलेउ मग लोगन्ह
दोहा २२३ · अयोध्याकाण्ड
दोहा पाठ
भरत दरसु देखत खुलेउ मग लोगन्ह कर भागु। जनुसिंघलबासिन्ह भयउबिधि बस सुलभ प्रयागु॥ २२३ ॥
अर्थ
भरतजी का स्वरूप देखते ही रास्ते में रहनेवाले लोगों के भाग्य खुल गये! मानो दैवयोग से सिंहलद्वीप के बसनेवालों को तीर्थराज प्रयाग सुलभ हो गया हो !
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “भरतजी चित्रकूट के मार्ग में” प्रकरण का दोहा २२३ है। इस प्रकरण में भरतजी का चित्रकूट की ओर विरह और दीनभाव से प्रस्थान का वर्णन है।
पूरा प्रकरण पढ़ें
पूरा प्रकरण पढ़ें
भरतजी चित्रकूट के मार्ग में