बरनि राम गुन सीलु सुभाऊ
बरनि राम गुन सीलु सुभाऊ
चौपाई १, दोहा १० के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
बरनि राम गुन सीलु सुभाऊ। बोले प्रेम पुलकि मुनिराऊ॥ भूप सजेउ अभिषेक समाजू। चाहत देन तुम्हहि जुबराजू॥ १ ॥
अर्थ
श्रीरामचन्द्रजी के गुण, शील और स्वभाव का बखान कर, मुनिराज प्रेम से पुलकित होकर बोले-- [हे रामचन्द्रजी!]। राजा (दशरथजी) ने राज्याभिषेक की तैयारी की है। वे आपको युवराज-पद देना चाहते हैं।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “राज्याभिषेक की तैयारी, देवताओं की प्रार्थना” प्रकरण का चौपाई १, दोहा १० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में रामराज्याभिषेक की तैयारी और देवताओं द्वारा सरस्वतीजी से वनगमन हेतु प्रार्थना का वर्णन है।
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राज्याभिषेक की तैयारी, देवताओं की प्रार्थना