सुनि सनेह साने बचन मुनि रघुबरहि
सुनि सनेह साने बचन मुनि रघुबरहि
दोहा ९ · अयोध्याकाण्ड
दोहा पाठ
सुनि सनेह साने बचन मुनि रघुबरहि प्रसंस। राम कस न तुम्ह कहहु अस हंस बंस अवतंस॥ ९ ॥
अर्थ
[ श्रीरामचन्द्रजी के ] प्रेम में सने वचनों को सुनकर मुनि वसिष्ठजी ने श्रीरघुनाथजी की प्रशंसा करते हुए कहा कि हे राम! भला, आप ऐसा क्यों न कहें। आप हंसवंश के भूषण हैं।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “राज्याभिषेक की तैयारी, देवताओं की प्रार्थना” प्रकरण का दोहा ९ है। इस प्रकरण में रामराज्याभिषेक की तैयारी और देवताओं द्वारा सरस्वतीजी से वनगमन हेतु प्रार्थना का वर्णन है।
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राज्याभिषेक की तैयारी, देवताओं की प्रार्थना