राम करहु सब संजम आजू

चौपाई २, दोहा १० के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

राम करहु सब संजम आजू। जौं बिधि कुसल निबाहै काजू॥ गुरु सिख देइ राय पहिं गयऊ। राम हृदयँ अस बिसमउ भयऊ॥ २ ॥

अर्थ

[इसलिए] हे रामजी! आज आप [उपवास, हवन आदि विधिपूर्वक] सब संयम कीजिए, जिससे विधाता कुशलपूर्वक इस काम को निबाह दें (सफल कर दें)। गुरुजी शिक्षा देकर राजा दशरथजी के पास चले गए। श्रीरामचन्द्रजी के हृदय में [यह सुनकर] इस बात का खेद हुआ कि--

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “राज्याभिषेक की तैयारी, देवताओं की प्रार्थना” प्रकरण का चौपाई २, दोहा १० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में रामराज्याभिषेक की तैयारी और देवताओं द्वारा सरस्वतीजी से वनगमन हेतु प्रार्थना का वर्णन है।

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राज्याभिषेक की तैयारी, देवताओं की प्रार्थना