बार बार कह राउ सुमुखि सुलोचनि

सोरठा २५ · अयोध्याकाण्ड

सोरठा पाठ

बार बार कह राउ सुमुखि सुलोचनि पिकबचनि। कारन मोहि सुनाउ गजगामिनि निज कोप कर॥ २५ ॥

अर्थ

राजा बार-बार कह रहे हैं-हे सुमुखी ! हे सुलोचनी ! हे कोकिलबयनी ! हे गजगामिनी! मुझे अपने क्रोध का कारण तो सुना।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “दशरथ-कैकेयी संवाद, सुमंत्र का राम को बुलाना” प्रकरण का सोरठा २५ है। इस प्रकरण में दशरथ-कैकेयी संवाद, दो वरों की माँग और सुमंत्र द्वारा श्रीराम को महल में बुलाने का वर्णन है।

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दशरथ-कैकेयी संवाद, सुमंत्र का राम को बुलाना