बार बार हिलि मिलि दुहु भाईं
बार बार हिलि मिलि दुहु भाईं
चौपाई ३, दोहा ३२० के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
बार बार हिलि मिलि दुहु भाईं। सम सनेहँ जननीं पहुँचाईं॥ साजि बाजि गज बाहन नाना। भरत भूप दल कीन्ह पयाना॥ ३ ॥
अर्थ
दोनों भाइयों ने माताओं से समान प्रेम से बार-बार मिल-जुलकर उनको पहुँचाया। भरतजी और राजा जनकजी के दलों ने घोड़े, हाथी और अनेक तरह की सवारियाँ सजाकर प्रस्थान किया।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “भरत की वापसी, पादुका स्थापना, नंदिग्राम निवास” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ३२० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में भरतजी की अयोध्या वापसी, पादुका स्थापना, नंदिग्राम निवास और भरत-चरित्र श्रवण की महिमा का वर्णन है।
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भरत की वापसी, पादुका स्थापना, नंदिग्राम निवास