हृदयँ रामु सिय लखन समेता

चौपाई ४, दोहा ३२० के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

हृदयँ रामु सिय लखन समेता। चले जाहिं सब लोग अचेता॥ बसह बाजि गज पसु हियँ हारें। चले जाहिं परबस मन मारें॥ ४ ॥

अर्थ

सीताजी एवं लक्ष्मणजी सहित श्रीरामचन्द्रजी को हृदय में रखकर सब लोग बेसुध हुए चले जा रहे हैं। बैल, घोड़े, हाथी आदि पशु हृदय में हारे हुए परवश मनमारे चले जा रहे हैं।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “भरत की वापसी, पादुका स्थापना, नंदिग्राम निवास” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ३२० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में भरतजी की अयोध्या वापसी, पादुका स्थापना, नंदिग्राम निवास और भरत-चरित्र श्रवण की महिमा का वर्णन है।

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भरत की वापसी, पादुका स्थापना, नंदिग्राम निवास