बाजहिं बाजने बिबिध बिधाना

चौपाई १, दोहा ११ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

बाजहिं बाजने बिबिध बिधाना। पुर प्रमोदु नहिं जाइ बखाना॥ भरत आगमनु सकल मनावहिं। आवहुँ बेगि नयन फलु पावहिं॥ १ ॥

अर्थ

बहुत प्रकार के बाजे बज रहे हैं। नगर के अतिशय आनन्द का वर्णन नहीं हो सकता। सब लोग भरतजी के आगमन को मना रहे हैं और कह रहे हैं कि वे भी शीघ्र आवें और [राज्याभिषेक का उत्सव देखकर] नेत्रों का फल प्राप्त करें।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “राज्याभिषेक की तैयारी, देवताओं की प्रार्थना” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ११ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में रामराज्याभिषेक की तैयारी और देवताओं द्वारा सरस्वतीजी से वनगमन हेतु प्रार्थना का वर्णन है।

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राज्याभिषेक की तैयारी, देवताओं की प्रार्थना